आदमी
अपने इर्द गिर्द
कुछ लोगों को पाकर
खुद को
" खुदा" समझने लगता है
क्यों भूल जाता है
कि
खुदा तब भी था
जब वह खुद नहीं था
खुदा तब भी रहेगा
जब वह खुद भी नहीं रहेगा
सोमवार, 22 फ़रवरी 2010
सही पहचान
कुछ लोग
अक्सर लोगों को
सही पहचान नहीं पाते हैं
जिन्हें वे अपना समझते हैं
जिनके लिए वे जान पर खेल जाते हैं
वे लोग ही पराये निकलते हैं
बस
अपना बनकर
और
अपना बनाकर
महज
अपना काम निकलते हैं
और फिर
इस तरह छोड़ जातें हैं
जैसे
कोई कामुक पुरुष
अपनी क्षुधा शांत कर
वेश्या को छोड़ जाता है
अक्सर लोगों को
सही पहचान नहीं पाते हैं
जिन्हें वे अपना समझते हैं
जिनके लिए वे जान पर खेल जाते हैं
वे लोग ही पराये निकलते हैं
बस
अपना बनकर
और
अपना बनाकर
महज
अपना काम निकलते हैं
और फिर
इस तरह छोड़ जातें हैं
जैसे
कोई कामुक पुरुष
अपनी क्षुधा शांत कर
वेश्या को छोड़ जाता है
शनिवार, 20 फ़रवरी 2010
कबूतर या गिद्ध
लोग
चेहरे पर चेहरा लगते हैं
ऊपर से
प्यार, प्रेम, अपनत्व
जताते हैं
लेकिन वास्तव में
सिर्फ अपना स्वार्थ
सिद्ध करते हैं
ना जाने
क्यों भूल जाते हैं
कि
बनावटी चेहरा
जब हट जायेगा
कबूतर के पीछे छिपा गिद्ध
सबको नज़र आ ही जायेगा
चेहरे पर चेहरा लगते हैं
ऊपर से
प्यार, प्रेम, अपनत्व
जताते हैं
लेकिन वास्तव में
सिर्फ अपना स्वार्थ
सिद्ध करते हैं
ना जाने
क्यों भूल जाते हैं
कि
बनावटी चेहरा
जब हट जायेगा
कबूतर के पीछे छिपा गिद्ध
सबको नज़र आ ही जायेगा
बचपन
क्यों हर इन्सान
बचे से
बड़ा होने को आतुर रहता है
क्यों जल्दी बचपन छोड़कर
बड़ा होना चाहता है
जबकि जनता है
कि
बड़े होकर जिमेदारियां ओदनी पड़ेंगी
और
जब बड़ा हो जाता है
तो
बस कहता ही रहता है
कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन
या फिर
गिव मी सम सन शाइन
गिव में सम रेन
गिव मी अनादर चांस
आई वांट तो ग्रो अप वंस अगेन
बचे से
बड़ा होने को आतुर रहता है
क्यों जल्दी बचपन छोड़कर
बड़ा होना चाहता है
जबकि जनता है
कि
बड़े होकर जिमेदारियां ओदनी पड़ेंगी
और
जब बड़ा हो जाता है
तो
बस कहता ही रहता है
कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन
या फिर
गिव मी सम सन शाइन
गिव में सम रेन
गिव मी अनादर चांस
आई वांट तो ग्रो अप वंस अगेन
अजीब रिश्ते
कल तक जो
हमेशा साथ निभाने का करते थे वादा
आज एक दूसरे को
एक आँख नहीं सुहाते
न जानने क्यों
दुनिया के ऐसे अजीब रिश्ते हैं
कुछ कदम साथ चलते हैं
फिर
अपनी अपनी राह पर
ऐसे चलते हैं
जैसे एक दूसरे को
पहचानते तक नहीं
हमेशा साथ निभाने का करते थे वादा
आज एक दूसरे को
एक आँख नहीं सुहाते
न जानने क्यों
दुनिया के ऐसे अजीब रिश्ते हैं
कुछ कदम साथ चलते हैं
फिर
अपनी अपनी राह पर
ऐसे चलते हैं
जैसे एक दूसरे को
पहचानते तक नहीं
सृष्टि दृष्टि
आप कभी बदल नहीं सकते - सृष्टि
बदलकर देखिये - दृष्टि
सारा संसार
ही
बदला बदला नज़र आएगा
हर असंभव
संभव
होता नज़र आएगा
बदलकर देखिये - दृष्टि
सारा संसार
ही
बदला बदला नज़र आएगा
हर असंभव
संभव
होता नज़र आएगा
सदस्यता लें
संदेश (Atom)