गुरुवार, 1 जनवरी 2009

नव वर्ष

नव वर्ष आया
नयी आशाएं साथ लाया
बीता जो बिसार दें
नए को निखार दें

जो गया समय वापिस नहीं आएगा
जो आएगा वही आगे ले जाएगा

विगत को भूलकर
आगत में रमकर
आगे सभी ने जाना है
नयी मंजिलों को पाना है

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2008

भारत - पाकिस्तान

भारत हो या पाकिस्तान
सिंध हो या राजस्थान
सब कुछ एक सा ही लगता है
फर्क सिर्फ़ इतना है - -
यहां हिंदू ज़्यादा हैं और वहां मुस्लमान
पर
हैं तो ये भी इन्सान और वो भी इन्सान
यहाँ भी दीवाली और ईद पर है जश्न
वहां भी ईद और दीवाली जश्न ही जश्न
यहाँ भी पकते है पकवान
वहां भी पकते हैं पकवान
फिर क्यों हमारे लीडरान
हमें बाँट- बाँट कर करते हैं परेशान
यदि दोनों देशों में हो जाए शान्ति
पूरी दुनिया में हो जाए क्रांति

इंसानियत

मैंने पूछा
आप कौन है , क्या करते हैं
जवाब मिला
मैं डॉक्टर हूँ डाक्टरी करता हूँ

दूसरे से पूछा तो जवाब मिला
मैं वकील हूँ वकालत करता हूँ

तीसरे ने कहा
मैं व्यापारी हूँ व्यापार करता हूँ

अगले ने कहा
मैं खिलाडी हूँ, सिर्फ़ खेलता हूँ

फिर उसके बाद
मैं अभिनेता हूँ, अभिनय करता हूँ

बहुत खोजा
और बहुतेरे मिले भी

नहीं मिला तो बस एक
सिर्फ़ एक
जो यह कहता -
मैं तो सिर्फ़ इन्सान हूँ
और बस
इंसानियत ही करता हूँ


बुधवार, 8 अक्टूबर 2008

आदमी के ख्याल

मैं यह करूँगा, मैं वह करूँगा
मैं यह बनूँगा, मैं वह बनूँगा
यह मेरा है, वह मेरा है
सब महज
महज ख्याल हैं आदमी के

सत्य केवल वही है
जो
"उसे" मंजूर है
वह चाहे तो
बस एक पल में
सब कुछ बदल दे
अमीर को गरीब
गरीब को अमीर
राजा को रंक और
रंक को राजा कर दे

शनिवार, 4 अक्टूबर 2008

कल आज और कल

जो कल कल था
वह आज हमारा नहीं रहा
जो आज आज है
वह कल हमारा नहीं रहेगा
जो कल कल आएगा
वह भी आज हमारा नहीं है

फिर क्यों हम विगत और आगत की चिंता में
सब कुछ खो रहें है
जागते हुए भी ऐसा लगता है
की
हम तो बस सो रहे है

ज़िन्दगी और रेल

समय गुज़र रहा है
जैसे बम्बई की लोकल रेल
आदमी चल रहा है
जैसे धीमी गति की कोई रेल
ज़िन्दगी गुज़र रही है ऐसे
जैसे - प्लेटफोर्म का हो यह खेल

ईसा और इंसा

ईसा ने बनाया इन्सा को
इन्सा ख़ुद ईसा बन बैठा
काश
इन्सा ईसा बनने की बजाय
महज
एक अच्छा इन्सान बन पाता