रविवार, 11 मई 2014

मदर्स डे

जिस माँ ने अपने बच्चों को
अपने खून से सींचा
जिस माँ  ने अपने बच्चों को
अपना पूरा जीवन दे दिया
जिस माँ ने अपने बच्चों को
दिन रात सब दे दिया
जिस माँ ने अपने बच्चों को
बच्चे से बड़ा किया
जिस माँ ने अपने बच्चों को
पढ़ाया ,सिखाया और लायक बनाया
उन बच्चों ने
अपनी उसी माँ के लिये
सारे साल मे सिर्फ़ एक ही दिन  बनाया
"हैप्पी मदर्स डे "

शुक्रवार, 9 मई 2014

आदमी और सोशल मीडिया

पेड़ों के झुरमुट होते  थे
पेड़ों  पर परिन्दे होते थे
पेड़  लहलहाते थे
परिन्दे  चहचहाते  थे
लेकिन
अब न पेड़ों के झुरमुट होते हैं
न
पेड़ों पर परिंदे होते हैँ
न
पेड़ लहलहाते हैं
न
परिंदे चहचहाते  हैं

हाँ
पेड़ों के झुरमुट दीखते हैं
पेड़ों पर परिन्दे  दीखते हैँ
लेकिन
सिर्फ फेसबुक,ट्विटर  और व्हाट्सप्प पर
लगता है
धीरे धीरे सारी जीवन्त  दुनियां
सोशल मीडिया पर सिमटकर रह जायेगी
आदमी आदमी न रहकर
फेसबुक की आईडी
और
ट्विटर का हैंडल रह जाएगा


रविवार, 13 अप्रैल 2014

वोटर और जोकर

कोई दल  कहता है हम आपके साथ है
कोई कहता है अबकी बार हमारी सरकार
लेकिन
हम सब जानते हैं
सरकार बन जाने के बाद
नेताओं को
कहाँ रहती है वोटरों की दरकार

आज तो आपके पीछे घूम घूमकर वोट ले जाएंगे
और पांच साल के लिए चोट दे जायेंगे
आज जो
आपको माई बाप बताते हैं
कल खुद हुकम के बादशाह बन जायेंगे
और
आपको तिरपनवे पते
जोकर की तरह
भूल जायेंगे

सोमवार, 24 मार्च 2014

वक्त



एक दिन
मुझे क्यों कर सूझा
कि
वक़्त
जो भागा  जा रहा है
इसे
पकड़कर  रख लिया जाए

अब
प्रश्न आया कि
भागते वक्त को पकड़ा कैसे जाए
सोचा
दौड़कर पकड़ ही लूँगा
और
मैं
दौड़ पढ़ा
वक्त को पकड़ने को
मैं
दौड़ दौड़ कर
थक गया परेशान हो गया
पर वक्त को
पकड़ना तो दूर
छू  भी नहीं पाया

जाता हुआ
वक्त किसी का हुआ है
कभी कोई वक्त को पकड़ पाया है
वक्त तो वक्त है
जो इसकी क़द्र करता है
सब उसकी क़द्र करते हैं



शनिवार, 8 मार्च 2014

महिला दिवस





महिला
माँ
बहन
पत्नी
बेटी
मासी
चाची
भाभी
और न  जाने क्या क्या

महिला है तो सृष्टि है
महिला से ही जीवन की  दृष्टि है
फिर भी
सारे साल में
महिला के लिए
बस एक ही दिन
महिला दिवस
  

रविवार, 23 फ़रवरी 2014

मन



हम
रोज़ पूछते हैं
दिन रात पूछते हैं
मन - तू कब समझेगा ?
जबकि
मन सब समझता है
हम ही हैं
जो
समझ समझकर
भी
समझना नहीं चाहते हैं

मन से पूछते रहते हैं
ऐ मन - तू कब समझेगा

मन कहता है
ऐ मानव मैं तो सब समझ रहा हूँ
पर
एक तुम ही हो
जो
समझ समझकर भी
न समझने का नाटक
करते आ रहे हो

बेचारा दिल



बेचारा दिल
आप समझते हैं
बेचारा है
जबकि इस दिल ने
बेचारा तो
आपको कर रखा है
आप जो भी कहें जो भी चाहें
ये मानता नहीं है
दिल ने
जो कह दिया
जो  चाह लिया
वो मनवाके रहता है
फिर भी
हम सब बेचारे
कहते है
बेचारा दिल