कविता
शनिवार, 5 मार्च 2016
बोलने की आज़ादी
बोलने की आज़ादी
है
बोलिये
लेकिन
बड़बोला मत बोलिए
बोलिए वही
जो इन्सान को शोभा देता है
बोलने की आज़ादी
है
बोलिये
लेकिन
बोलने की आज़ादी
के नाम पर
अपनी माँ को
अपनी जन्मभूमि
को
गाली तो मत दीजिये
रविवार, 28 फ़रवरी 2016
सवेरे का सूरज
सवेरे का सूरज
रोज़
नया सन्देश देता है
उठ
जाग
और
लग
अपने सपनो को सच कर
और
इन सपनो को सच करना है
तो
कर्म
करना ही होगा
दिन को सपने देखना छोड़
दिन रात एक करना होगा
फिर
सफलता तुम्हारी है
दुनिया के रंगमंच
पर
तुम महानायक
और
दुनिया की
सारी
तालियाँ तुम्हारी हैं
मौत
मौत
खबर मौत की
कुछ ऐसी होती है
कि
कहीं पत्थर दिल पसीज जाते है
और
कभी तो
कोमल हृदय
भी
पत्थर हो जाते हैं
आत्मविश्वास
आत्मविश्वास
अपने पे भरोसा रख मेरे भाई
समन्दर भी तर जाएगा
किसी और के भरोसे
तो
छोटी सी नदिया
में
डूब जाएगा
बुधवार, 16 सितंबर 2015
ख़ुशी
ख़ुशी
जिसको
जब भी
जैसे भी मिली है
बड़ी जल्दी में ही रहती है
देख कर
दो पल
जी भर कर बात भी नहीं कर पाते है
और
आगे निकल जाती है
रह जाती है
सिर्फ ख़ुशी की यादें
और
फिर अगली बार मिलने
का
इंतज़ार
रविवार, 14 जून 2015
मौन
मौन
एक भाषा है
कभी बोलकर तो देखिये
दिल में जो बात आ रही है
कभी
दिल में ही तोलकर तो देखिये
कभी कहीं कड़वाहट लगे
उसमे
मिठास घोलकर तो देखिये
अपना तो अपना है
पराया भी अपना हो जायेगा
मंगलवार, 14 अप्रैल 2015
दो मीठे बोल
बेचारा दिल
क्या चाहे ,
बस सुनना चाहे
दो मीठे बोल
तोल तोल कर बोल
बस
दो मीठे बोल
बेचारा दिल
जब जब सुने
किसी के भी
दो मीठे बोल
खुश होकर
बस डोल डोल
वाह रे वाह
दो मीठे बोल
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