शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

अपनी अपनी दुनिया

इस दुनिया में 
हर शख्श 
अपनी एक अलग दुनिया 
बना लेता है 
और 
उस दुनिया की शतरंज में
कभी राजा ,
कभी  वजीर 
कभी हाथी ,घोडा, ऊंट 
तो 
कभी प्यादा 
बन जाता है 
इस तरह  
हर शख्श 
अपनी अपनी दुनिया  
में 
पूरा जीवन जी जाता है  
अपने हिस्से  की 
ज़िन्दगी  की 
हाला पी जाता है















सोमवार, 2 जनवरी 2012

स्वागत २०१२

दो हजार ग्यारह
हुआ नौ दो ग्यारह
कहीं लाया खुशियाँ ही खुशियाँ
कहीं छोड़ गया सिर्फ गम ही गम

दो हजार बारह आया है
देखना है
अपने पिटारे में
क्या क्या भरके लाया है

सोचना क्या
जो भी होगा देखा जायेगा
अभी तो बस यही शुभेच्छा है
दो हज़ा बारह
में
सबकी हो पौ बारह

शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

वो कचरा बीनती है

वह रोज़ सवेरे
सड़क पर आ जाती है
अपनी दूध पीती बच्ची
को
जुगाड़ के झूले में
लिटाकर
कचरा बीनने में लग जाती है

कागज़ का टुकड़ा
प्लास्टिक की बोतल
आपके, हमारे फेंके हुए
सरे बेकार सामान
उसके बड़े काम के होते हैं


आप - हम
पेट भरकर
जो रोटियां और रोटियों के टुकड़े
फेंक देते हैं
वही उसका पेट भरते हैं

वही बीन हुआ कचरा
वही बचा -खुचा खाना
उसका सारा परिवार चलाते हैं

शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

समय परिवर्तन


पहले
लोगों के घरों पे
आदमी खड़े होते थे
कि
कहीं कोई कुत्ता न आ जाये


अब
लोगों के घरों पे
कुत्ते खड़े रहते हैं
कि
कहीं कोई आदमी न आ जाये

शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011

बत्तीस

इंदिरा अम्मा
ने
नारा दिया था
' गरीबी हटाओ'

अब इन्होने
गरीबों का नाम ही
आमिर कर दिया

"बत्तीस" के फार्मूले से
सबकी बत्तीसी खिल गयी
अब जो रोज़
रुपये बत्तीस कमाएगा
गरीब
नहीं
अमीर
कहलायेगा

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

अपना या सपना

लोगों से
मिलते रहने से

पता तो चलता है
कि
कौन कैसा है ?
कौन अपना है
और
कौन महज सपना है

शनिवार, 1 अक्टूबर 2011

महंगाई मार गयी

महंगाई मार गयी

बिजली को महंगा किया
फिर
पेट्रोल के भाव बदा दिए
अब
ब्याज दर बढाके
लोन महंगे कर दिए
अब सुनते हैं
कि
घरेलू गैस कि बारी है
तब
आम आदमी क्या खाक जियेगा
जीते जी मर ही जायेगा