शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

दोस्त और दुश्मन



दोस्त  और दुश्मन
में फर्क
अगर नज़रों से कर सकते
तो
कितना अच्छा होता

नज़र अगर पहचान पाती
कि
कौन दोस्त है
और
कौन है दुश्मन
तो
ज़िन्दगी कितनी आसान हो जाती
दोस्त से अच्छी दोस्ती निभाते
और
दुश्मन से अच्छी दुश्मनी
दुश्मन को
ज़िन्दगी से ऐसे निकालते
जैसे हो
दूध में कोई मक्खी

नज़रों के इस डर से
दोस्त हमेशा दोस्त ही बने रहते
और
दुश्मन कभी सामने आ ही  नहीं पाते 

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